where is God, how will god meet, what does God do?

परमात्मा कहा है ,करते क्या है और कैसे मिलेगे ….

where is god /bhagwan/ parmatma
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नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है ओनली लाइफ टिप्स में और आज का विषय है परमात्मा/भगवान कहां है परमात्मा/भगवान कहां मिलेंगे और करते क्या हैं, इन तीन प्रश्नों का जवाब आपको मिलेगा तो चलिए शुरू करते हैं बहुत पहले की एक बात है एक राज्य में एक राजा हुआ करता था राजा को लोगों का न्याय करते करते , उसे खुद को ऐसा लगने लगा था, कि भगवान नाम की कोई सत्ता होती ही नहीं है इसलिए उसने एक दिन अपने राज्यसभा में यह ऐलान कर दिया कि मुझे इन तीन प्रश्नों का जवाब जो बताएगा उसे में अपना आधा राज्य दे दूंगा तो उनका जो मंत्री था वह मंत्री भी जवाब तो सही से दे नहीं पा रहे थे और कहां है बता नहीं पाता था “करते क्या है “यह तो बता देता था कि भगवान की बनाई सृष्टि है दुनिया है इसका जवाब तो दे रहे थे दूसरे मंत्री लोग कहां है कैसे मिलेंगे इन प्रश्नों का जवाब कोई नहीं दे पा रहा था । फिर एक बार राजा जब भ्रमण के लिए जा रहे थे तो उसे एक रास्ते में एक “दानवीर” मिला राजा ने कहा यह काम तो मैं करता हूं दान देने का और लोगों का भी हालांकि जो दान दे रहा था वह उतना अमीर भी नहीं था पर अपने जीवन से संतुष्ट था खुश था खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा था तो राजा ने बोला कि तुम ऐसा कैसे कर पा रहे हो तब उसने बताया कि आपके राज्य में एक मंत्री है जिसका नाम श्याम है और उस मंत्री के नौकर से ही मैं सीखा हूं और उसने ही मुझे इस योग्य बना दिया है कि मैं लोगों को दान दे पाता हूं , महाराज आप उस श्याम नाम के मंत्री के नौकर से पूछे या डायरेक्ट श्याम नाम के मंत्री से पूछे ,आपको आपके सारे सवाल का जवाब वह दे देगा

raja Mantri se milta hai

तब राजा उस श्याम नाम के मंत्री से मुलाकात करता है और कहता है कि मुझे यह तीन प्रश्नों के उत्तर तुम बताओ नहीं तो मैं तुम्हें प्राण दंड दे दूंगा , अब वह श्याम नाम का मंत्री कहां महाराज से कि मुझे 1 सप्ताह का मोहलत दीजिए राजा ने कहा ठीक है जहां उस राजा के सारे मंत्री ने एक महीना समय लिया इसने तो मात्र 1 सप्ताह ही मांगा था इसलिए राजा सहमत भी हो गया, चलो ठीक है , मैं तुम्हें 1 सप्ताह का समय देता हूं अब वह मंत्री रोज परेशान रहता इधर-उधर देखते रहता सोचते रहता, अपने घर में पड़ा रहता, नौकर को मालिक का ऐसी स्थिति देखकर उसे रहा नहीं जा रहा था , उस नौकर ने कहा मालिक आप मुझे बताइए क्या परेशानी है तो मालिक शुरू में टालमटोल करने लगा उसे लगा कि जो इतना बड़ा दूसरे बड़े मंत्री नहीं बता पाए कि एक छोटा सा नौकर क्या बताएगा तो वह उसे बता भी नहीं रहा था फिर लास्ट दिन उस नौकर ने मालिक से जिद करने लगा मालिक बताइए जो होगा मैंने आपका नमक खाया हू , मैं आपको दुख में कैसे देख सकता हूं ,अब वह नोकर विनम्र विनती करने लगा तब नौकर का मालिक ने उसे बताया कि राजा ने मुझे यह 3 प्रश्नों का जवाब ढूंढने के लिए कहा है । या बताने के लिए कहा है अन्यथा मुझे 1 सप्ताह बाद यानी परसों मुझे प्राण दंड दे दिया जाएगा तब वह नौकर कुछ देर सोचा और सोचने के बाद कहा मालिक से कि आप राजा से यह कहिए कि यह सवाल का जवाब तो मेरा नौकरी दे देगा, इस सवाल में कुछ है ही नहीं और मंत्री अपने नौकर पर संदेह करने लगा कहने लगा कि तुम मुझे पक्का मरवा दोगे । नौकर ने कहा नहीं मालिक मुझ पर विश्वास करिए, अगर कुछ होगा तो मैं अपने डांड का स्वयं भागी बनूंगा , नौकर के बार-बार समझाने के बाद फिर वह मंत्री कहां ठीक है अब 7 दिन पुर गया, राज्यसभा में दोनों उपस्थित हो गए, मंत्री और नौकर दोनों , राजा ने कार्रवाई शुरू किया और मंत्री से पूछा बताओ मंत्री मेरे तीनो प्रश्नों का उत्तर है तुम्हारे पास या अन्यथा नहीं , तो मंत्री ने कहा मंत्री महाराज ऐसे छोटे प्रश्नों का जवाब तो मेरा नौकर ही दे सकता है अगर नहीं दे पाया तोह तुम्हारा भी प्राण जाएगा और साथ में उस नौकर का भी जाएगा मंत्री ने कहा ठीक है महाराज तब उस मंत्री ने नौकर को राज्यसभा में बुलाने का आज्ञा मांगा जब वह नौकर आया तो

Raja aur naukar : राजा और नौकर

राजा ने पूछा बताओ मेरे तीनों प्रश्नों का उत्तर तब उस नौकर ने कहा महाराज मैं आपके तीनों प्रश्नों का उत्तर दूंगा, पर उससे पहले मुझे एक गिलास दूध पीना है सो आप मुझे एक गिलास दूध दे राजा ने कहा अपने नौकरों से कि जाओ ले आओ एक गिलास दूध इसको पीने के लिए जब वो एक गिलास दूध लाया तो उसने पाया कि वह नौकर वह हाथ में गिलास लेकर उस भरे हुए गिलास के अंदर ढूंढ रहा था । बहुत देर तक वह ढूंढता रहा, राजा परेशान होकर कहता है कि मूर्ख इसमें क्या ढूंढ रहे हो तब वह नौकर बोलता है महाराज इसमें मैं घी ढूंढ रहा हूं , राजा बोला अरे मूर्ख इसमें घी कैसे आएगा , अरे मूर्ख  तुम्हें अगर घी ही चाहिए था तो मैं तुम्हें भी मंगा देता फिर नोकर बोला, नहीं महाराज मैं तो इसमें घी ही ढूंढ रहा हूं, राजा बोला घी के लिए तो एक निश्चित प्रक्रिया करना पड़ता है उसे जमाना पड़ता है फिर उसे मथना पड़ता है फिर आग पर तपना पड़ता है , तब जाकर वह प्राप्त होता है नौकर ने बोला महाराज आप के पहले प्रश्न का उत्तर मिल गया वह परमात्मा हम लोगों के घट भीतर ही हैं जिस प्रकार दूध के भीतर घी है , महाराज ने कहा और दूसरे प्रश्न का जवाब क्या है ? तो नौकर ने बोला कि महाराज इसका भी उत्तर आपने ही दे दिया महाराज बोला वह कैसे आपने बोला घी को प्राप्त करने के लिए जमाना होता है मथना होता है तपाना होता है । उसी प्रकार उस घट भीतर बैठे आत्मा परमात्मा को प्राप्त करने के लिए साधना करनी पड़ती है , जमना पड़ता है, तपना पड़ता है तो इन तीन प्रश्नों का उत्तर इस प्रकार रहा परमात्मा कहां है तो वह घट भीतर है परमात्मा करते क्या है जब राजा यह पूछता है परमात्मा करते क्या हैं तब नौकर बोलता है महाराज मैं आपके दो प्रश्नों का उत्तर दे चुका हूं और आपको संतुष्ट भी कर चुका हूं अब मेरी इच्छा है आप उसे मानेंगे तभी मैं आपको बताऊंगा क्योंकि आपके राज्य में जितने भी ज्ञानी थे आप उन लोगों से पहले ही पूछ चुके हैं और वह लोग जवाब भी नहीं दिए फिर भी वह आपके राज्य के मंत्री बने हैं तब राजा ने कहां बताओ अपनी शर्त , महाराज मैं आपके सिंहासन पर बैठना चाहता हूं और आप यहां चले हैं जहां मैं खड़ा हूं , वहां आप खड़े हो जाए और मैं सिहासन पर बैठूंगा राजा हैरान ऐसा कैसे हो सकता है तो फिर राजा सोचते-सोचते कहा ठीक है मैं तुम्हें थोड़ी देर के लिए अपने सिहासन पर बैठने दूंगा तब फिर वह नौकर जाकर सिहासन पर बैठ गया और जो राजा था वह नीचे चले आया अब राजा बोला बताओ मेरे तीसरे प्रश्न का उत्तर परमात्मा करते क्या हैं तब नौकर ने बोला यह जो अभी-अभी घटित हुआ प्रक्रिया यही तो परमात्मा करते हैं राजा को रंक और रंक को राजा बनाते हैं जो लोग परमात्मा खोजते रहते हैं उन्हें कहीं बाहर नहीं जाने की जरूरत है वह परमात्मा आपके घट भीतर ही हैं उसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया करनी होगी आपको साधना करनी होगी तब जाकर वह प्राप्त होगी तभी आप नर से नारायण बन पाएंगे । जब राजा अपने तीनों प्रश्नों का उत्तर पाकर संतुष्ट हो गया तो उस नौकर को आधार राज्य भी दिया और फिर वह आध्यात्मिक ज्ञान भी प्राप्त किया उस नोकर के दुवारा।

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जय श्री राम